Sunday, June 27, 2010
Saturday, June 26, 2010
DR. SHALINIAGAM (SHUBH AAROGYAM)

ॐ
Boundaries and walls are very different things. As you decide what to accept and what to reject, you learn to live feeling protected and yet free of walls.
Rather than collapse yourself into thoughts of the future, stay in the present, for considerable hard work is involved in a time for healing and transformation.
The one who wanders independent in the world, free from opinions and viewpoints, does not grasp them and enter into disputations and arguments. As the lotus rises on its stalk unsoiled by the mud and the water, so the wise one speaks of peace and is unstained by the opinions of the world."
The lotus flower grows in muddy water
and rises above the surface to bloom with
remarkable beauty.
Untouched by the impurity, lotus symbolizes
the purity of heart and and mind.
The lotus flower represents long life,
health, honor and good luck.
Those are my wishes to you precious friend,
A day filled with goodness and peace to you!
ॐ
dr. shailiniagam
डॉ.शालिनिअगम (शुभ आरोग्यं)स्वेम प़र विश्वास ही आपकी जीत है
यह जो हमारी लाइफ है न ,हर बार दो रास्ते नज़र आयेंगे ....... हर पल मन में अनेक आवाजें सुनाई देंगीं .........उलझन का समय आएगा...........
ये काम करूँ या ना करूँ , इस रास्ते जाऊं या उस रास्ते जाऊं .इस उलझन और संशय कि स्तिथि में स्वयम की ही सोच काम करेगी.
भटकना छोड़ कर मनन करें , केवल अपने मन की बात प़र ध्यान दें .केवल अपने मन कि बात को जानने प़र ही सच्चाई को जान पाओगे.
उलझन से बचने का एक ही रास्ता है, केवल अपने मन कि बात सुनो ,self-centered होकर ही जीत पा सकते हो . अगर तुमने अपने अंदर
की आवाज को पहचान लिया है तो बाहर कुछ भी पाने की , ढूढने की आवश्यकता नहीं है ,
अपनी आँखे खुली रखो , तभी सच जान पाओगे, जब अपनी आँखें बंद रखोगे तो सच भी भीतर ही बंद हो जाएगा .
अपने अंदर की आवाज जो तुमने खुद ही मनन करके सुनी है,उसी में से ,तुम्हारे भीतर से एक नया ,चमकता हुआ ,आत्मनिर्भर,
केवल तुम्हारा ही विजय-गान सामने आएगा ,और देखो ........... जीवन मस्त और कितना खुशहाल बन रहा है
तुम्हारा जीवन निराशा के अँधेरे से निकल कर आशा के उजाले से भर रहा है.
by
dr.shaliniagam
Shubh Aarogyam
The spiritual Reiki healing & training center
e-4/30 krishna nagar Delhi-1100051
www.aarogyamreiki.com
ये काम करूँ या ना करूँ , इस रास्ते जाऊं या उस रास्ते जाऊं .इस उलझन और संशय कि स्तिथि में स्वयम की ही सोच काम करेगी.
भटकना छोड़ कर मनन करें , केवल अपने मन की बात प़र ध्यान दें .केवल अपने मन कि बात को जानने प़र ही सच्चाई को जान पाओगे.
उलझन से बचने का एक ही रास्ता है, केवल अपने मन कि बात सुनो ,self-centered होकर ही जीत पा सकते हो . अगर तुमने अपने अंदर
की आवाज को पहचान लिया है तो बाहर कुछ भी पाने की , ढूढने की आवश्यकता नहीं है ,
अपनी आँखे खुली रखो , तभी सच जान पाओगे, जब अपनी आँखें बंद रखोगे तो सच भी भीतर ही बंद हो जाएगा .
अपने अंदर की आवाज जो तुमने खुद ही मनन करके सुनी है,उसी में से ,तुम्हारे भीतर से एक नया ,चमकता हुआ ,आत्मनिर्भर,
केवल तुम्हारा ही विजय-गान सामने आएगा ,और देखो ........... जीवन मस्त और कितना खुशहाल बन रहा है
तुम्हारा जीवन निराशा के अँधेरे से निकल कर आशा के उजाले से भर रहा है.
by
dr.shaliniagam
Shubh Aarogyam
The spiritual Reiki healing & training center
e-4/30 krishna nagar Delhi-1100051
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Friday, June 25, 2010
Dr.Shaliniagam (sammanit-apmanit hoti hoon main)

कभी सम्मानित कभी अपमानित होती हूँ मैं
घर की लक्षमी बन मान पाती हूँ
छोटो के अपनत्व से भीगते हुए
बडो से आदर मान पाती हूँ मै
घर को सजाती-खुशिओं को बरसाती
पाती की बांहों में सिमट जाती हूँ मैं
बच्चो की किलकती हँसी में हूँ मै
सास-ससुर के आशीर्वादों मे हूँ मैं
पर अचानक एक दिन उस तीसरी
के जुड़ने पर सिलसिला शुरू हुआ ,
अपमानों का दिल का चैन बोझ बन गई,
सम्मानित-अपमानित होती रही॥
मखमली स्पर्श? कांटे लगने लगा ,
कुछ तो कमी थी जो दूसरी के पास गया
मेरा बेटा तो बस निभा रहा था किसी तरह
माँ मे ही कमी थी पापा तो बहुत अच्छे है............
टूटती- बिखरती -समेटती रही
चुप-चुप आंसू बहाती रही, क्योकि
सम्मानित-अपमानित होती हूँ मै
फिर एक दिन बाहर वाली ने दे दिया धोखा
मन की नही,तन की नही, पैसे की निकली पुजारिन
बेहोशी टूटी याद आई बीबी
पछतावा दो दिलो को फिर से जोड़ गया
सारे रिश्ते अचानक बदल गए
हमसफ़र के अपनाते ही
सम्मानित होने लगी हूँ
क्योकि..........................
सम्मनित -अपमानित होती हूँ मैं ।
......................dr.shaliniagam
www.aarogyamreiki.com
Wednesday, June 23, 2010
डॉ.शालिनिअगम (शुभ आरोग्यं) एक मुस्कान
एक मुस्कान
अगर आज मेरी मुस्कराहट से,
एक दिल भी खुश होता है,
अगर आज मेरे खिलखिलाने से ,
एक कली भी मुस्कुराती है,अगर आज मेरे किसी एक ,
कार्य से कोई मन गुनगुनाता है....................
तो लीजिए हम मुस्कुरा दिए
प़र..............................
मेरी ये मुस्कराहट केवल होठों प़र ही नहीं,
मेरे सत्कर्मों में भी होगी ,
जिसमे किसी जरूरतमंद की ,
कोई इच्छा पूरी होगी,
तभी मेरी ये मुस्कराहट सार्थक होगी
डॉ.स्वीट एंजिल
Tuesday, June 22, 2010
शालिनिअगम (शुभ आरोग्यं)
Watch your thoughts; they become words.
Watch your words; they become actions.
Watch your actions; they become habits.
Watch your habits; they become character.
Watch your character; it becomes your destiny. "Enthusiasm is one of the most powerful engines of success. When you do a thing, do it with all your mind. Put your whole soul to it. Stamp it with your own personality. Be active, be energetic, be enthusiastic and faithful, and you will accomplish your object. Nothing great was ever achieved without enthusiasm."
Dr.Sweet Angel
Tuesday, June 15, 2010
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