Wednesday, June 2, 2010

शालिनीअगम ( कुछ शब्द मेरे अपने)

namaste India

सौंदर्य का सार
सौंदर्य ........................................
भला लगता है नेत्रों को,
सुखद लगता है स्पर्श से,
सम्पूर्ण विश्व एक अथाह सागर ,
जिसमें भरा है सौंदर्य अप्पर,
हर चर-अचर हर प्राणी ,
सौंदर्य को पूजता है बारम्बार !
सौंदर्य का कोष है पृथ्वी-लोक ,
सौंदर्य का भण्डार है देव- लोक,
प्रत्येक पूजित-अपूजित व्यक्ति,
कल्पना करता है तो केवल ,
सौंदर्य को पाने की ,
परन्तु......................
ऐसे कितने मिलते हैं यंहा ,
जो रूपता-कुरूपता को,
समान पलड़े प़र तोलते हैं ,
जो चाहतें हैं मानव-मात्र को
मानते हैं दोनों को समान

8 comments:

DHIRAJ said...

.........BEAUTIFUL...........

satyendr said...

shalini u r too good

Anonymous said...

AWESOME
AWESOME
AWESOME
AWESOME
AWESOME

shaliniagamaggarwal said...
This comment has been removed by the author.
Anonymous said...

प्रिय शालिनी
आप मुझे भा गयीं हैं.
आपका लेखन प्रभावशाली है
डॉ.झा

Dr. shyam gupta said...

yeh, beauty is in the eyes of beholder.

nanhe said...

very nice shalinee ji

very sweet ...........
shashivendra kumar saini
karhal mainpuri

SHASHIVENDRA KUMAR SAINI said...

namaste shalinee ji

very nice .... and very sweet

write little more on father's day


thanks