मैं आभारी हूँ उस परमात्मा की,मेरे जीवन का हर -पल
एक उत्सव के सम्मान है । सुबह आँखे खोलने से लेकर रात को सोने तक मैं और मेरा परिवार हर-पल आनंद का अनुभव
करता है , मेरी सभी इच्छाएँ स्वत : ही पूरी हो जाती हैं ।
मैं ख़ुशी हूँ और खुशियाँ बाँटती हूँ
शालिनीअगम
१९८९ .....................2010