Monday, July 19, 2010

शालिनिअगम (शुभ आरोग्यं )



नमस्ते भारतवर्ष
जितना आपके पास है
उससे ज्यादा देने की इच्छा रखो,
और बदले में कुछ भी पाने की
आस मत रखो,
अनजानी तृप्ति व् संतुष्टि से भर जाओगे ....................

चेहरे प़र सदैव मुस्कराहट खिली रहने से ,
अपनों को एक अनजानी ताकत और
ख़ुशी का अहसास होता है,
और आपके होने से उनको पूर्णता का अनोखा एहसास होता है.........................

जब भी ज़िन्दगी में ऐसा लगे कि सब कुछ ख़त्म हो गया,सारे दरवाजे बंद हो गए,
कुछ भी बाकी बचा,
तब ऐसे में एक नया सूर्योदय होता है,एक नई शुरुवाद होती है ........................

अपने दिल कि सुनो,
जो अच्छा लगे वही करो,
अपनी ख़ुशी को पहचानो,
क्योंकि जब आप अंदर से खुश होगे ,
तभी दूसरों को ख़ुशी दे पाओगे ............................

1 comment:

kamlesh verma said...

अनुपम -सुंदर सत्य ------उल्लास बढ़े वो कम करो ,आनंद बढ़े वो काम करो --एंजिल बन शुभ काम करो ,सुख शांति बढ़े वो काम करो ,--उस पथ पर चल काम करो जो राह दिखाए सुखद सुखद --जो पसंद वो काम करो सब स्वीट -स्वीट से काम करो .