Saturday, August 8, 2015
Friday, May 1, 2015
Friday, January 9, 2015
Dr.Shalini Agam
एक मुस्कान 










अगर आज मेरी मुस्कराहट से,
एक दिल भी खुश होता है,
अगर आज मेरे खिलखिलाने से ,
एक कली भी मुस्कुराती है,
अगर आज मेरे किसी एक ,
कार्य से कोई मन गुनगुनाता है....................
तो लीजिए हम मुस्कुरा दिए
प़र........................... ...
मेरी ये मुस्कराहट केवल होठों प़र ही नहीं,
मेरे सत्कर्मों में भी होगी ,
जिसमे किसी जरूरतमंद की ,
कोई इच्छा पूरी होगी,
तभी मेरी ये मुस्कराहट सार्थक होगी
डॉ.शालिनिअगम
अगर आज मेरी मुस्कराहट से,
एक दिल भी खुश होता है,
अगर आज मेरे खिलखिलाने से ,
एक कली भी मुस्कुराती है,
अगर आज मेरे किसी एक ,
कार्य से कोई मन गुनगुनाता है....................
तो लीजिए हम मुस्कुरा दिए
प़र...........................
मेरी ये मुस्कराहट केवल होठों प़र ही नहीं,
मेरे सत्कर्मों में भी होगी ,
जिसमे किसी जरूरतमंद की ,
कोई इच्छा पूरी होगी,
तभी मेरी ये मुस्कराहट सार्थक होगी
डॉ.शालिनिअगम
Tuesday, January 6, 2015
'डॉ शालिनी अगम '
समकालीन परिदृश्य को उकेरती ,समसामयिक समस्याओं से झूझती और फिर स्वम् को संयत कर एक काल्पनिक खुशीयों भरे संसार को रचती 'डॉ शालिनी अगम ' की एक हृदय को झकझोरती {कला}कृति
कैनवस
चलो आज मन को कैनवास कर लूँ
झोली अपने जहाँ की खुशियों से भर लूँ
बिखेर दूँ ढेर सारे अपनी खुशियों के रंग
खेलूं पूरी होती अपनी आशाओं के संग
जहाँ चाँद चमकेगा मेरे गगन में
फूल भी खिलंेगे मन के उपवन में
खिंचूंगी न एक रेखा भी कालिमा की
दुःख की ,बेबसी की ,लाचारी और बीमारी की
हर रंग बस खिलखिलाती हंसी का भर लूँ
चलो आज मन को कैनवास कर लूँ
सतरंगी स्वप्न झिल मिलाएंगे जहाँ
शहनाइयाँ गठ-बंधनों की सजती यहाँ
बाँसुरिया प्रेम की बजते रहे वहां
थाप ढोलकी की उम्मीद की जहाँ
सातों सुरों में आनंद स्वर भर दूँ
चलो आज मन को कैनवास कर लूँ
उकेर लूँ एक जहाँ प्रेम और मिलन का
उत्सव मनाते लोग हों बस जहाँ
रक्तिम वर्ण हो उन्नति के सूर्य का
सुहाग का ,सौभाग्य का और त्योहारों का
रंग लाल न हो जिसमे ज़ालिम लहू का
कैनवास हो भरा पूरा बच्चों की किलकारियों से
उदासी न हो जहाँ रोदन और अश्रूं कीवजह से
लीप दूँ सारे समाज के दुश्मनों को
मिटा दूँ तस्वीर में भी उन राक्षसों को
ढेर रंग फेंक तबाह कर दूँ मैं वो कलाकृति
धूमिल कर उनको सजा लूँ पूजा की आरती
जिसमे हों आतंकी और हिंसा के पुजारी
जीतेगी किस्मत मेरी दुशमन की किस्मत हारी
हर रंग शांति और अमन का भर लूँ
चलो आज मन को कैनवास कर लूँ
डॉ शालिनी अगम
एम. ए. हिंदी पी एच डी
स्पिरिचुअल हीलर
Friday, December 26, 2014
dr.shalini agam .. welcome 2015 .happy new year
नूतन वर्षाभिनंदन
नव कल्पना ,नव सर्जना ,सुख-शांति ,नव हो भाग्य -विधान
भाईचारा ,बंधुत्व ,प्रेम ,उन्नति , सहयोग मेरा भारत महान
आनंदित करे आपको दे असीमित हर्ष,
मंगलकारी , प्रफुल्लित हो मित्र नवल वर्ष !........
नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं आप सबको सपरिवार कुछ नया सोचें, कुछ नया
करें बस चलो किसी का घर भर दें खुशियों का बना समंदर कोई उसके जीवन को तर
कर दें।
चलो आज सांता बन जाएँ
एक पोटली खुशियों की ले
किसी की मुस्कराहट बन जाएँ
निकल पड़ें चलो उन रास्तों पे
जहाँ किसी के काम आ जाएँ
भर ली है मैंने तो आज ये झोली
शाल,कम्बल,ऊनी स्वेटर से
ठिठुरते बदनों को चलों ढांप आयें
केक -कैंडी बाँट स्वाद उनका चखाएं हम
पॉकेट मनी से किसी घर का राशन भर आएं हम
प्रेम,प्यार सद्भाव बस यही अस्त्र अब मेरे
चलो नफरत,ईर्ष्या ,द्वेष मिटा आएं हम
सुख-दुःख अपना बाँट लेंगे आधा-आधा
घर तक ही सीमित नहीं बाहर आंसूं पोंछ आएं
चलो आज सांता बन जाएँ
डॉ शालिनी अगम {डॉ स्वीट एंजेल }
पी . एच . डी हिंदी साहित्य
स्पिरिचुअल हीलर ,रेकी ट्रेनर
नव कल्पना ,नव सर्जना ,सुख-शांति ,नव हो भाग्य -विधान
भाईचारा ,बंधुत्व ,प्रेम ,उन्नति , सहयोग मेरा भारत महान
आनंदित करे आपको दे असीमित हर्ष,
मंगलकारी , प्रफुल्लित हो मित्र नवल वर्ष !........
नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं आप सबको सपरिवार कुछ नया सोचें, कुछ नया
करें बस चलो किसी का घर भर दें खुशियों का बना समंदर कोई उसके जीवन को तर
कर दें।
चलो आज सांता बन जाएँ
एक पोटली खुशियों की ले
किसी की मुस्कराहट बन जाएँ
निकल पड़ें चलो उन रास्तों पे
जहाँ किसी के काम आ जाएँ
भर ली है मैंने तो आज ये झोली
शाल,कम्बल,ऊनी स्वेटर से
ठिठुरते बदनों को चलों ढांप आयें
केक -कैंडी बाँट स्वाद उनका चखाएं हम
पॉकेट मनी से किसी घर का राशन भर आएं हम
प्रेम,प्यार सद्भाव बस यही अस्त्र अब मेरे
चलो नफरत,ईर्ष्या ,द्वेष मिटा आएं हम
सुख-दुःख अपना बाँट लेंगे आधा-आधा
घर तक ही सीमित नहीं बाहर आंसूं पोंछ आएं
चलो आज सांता बन जाएँ
डॉ शालिनी अगम {डॉ स्वीट एंजेल }
पी . एच . डी हिंदी साहित्य
स्पिरिचुअल हीलर ,रेकी ट्रेनर
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