Wednesday, September 15, 2010

SHALINIAGAM HINDI DIWAS ( क्योंकि हिंदी हूँ मैं)

क्योंकि हिंदी हूँ मैं ,हिंदी हूँ मैं !

हिंद में पैदा हुए ,
हिंद की हवा में जिए,
हिंदी में ही खाया,
पहना ,बोला और चला ,
प़र जब इतराने की बारी आई,
तो कंधे चौड़े किये अंग्रेजी में ?
अगर रख सको तो अस्तित्व हूँ मैं,
छुपा दो तो एक निशानी हूँ मैं,
गलती से खो दिया..........
तो केवल एक कहानी हूँ मैं,
अंग्रेजी के पत्थर खाकर भी,
मुस्कुराने की आदत है मुझे ,
दुनिया की नज़र में कुछ चुभी सी,
मगर गर्व की दास्ताँ हूँ मैं,
मेरे अपने चाहें ना पहचाने अब मुझको,
प़र उनकी रग-रग में बसी ,
उनके गौरव की आग हूँ मैं ,
मेरे कर्णधारों कुछ तो सोचो ,
तुम्हारे बुजुर्गों का मन-प्राण हूँ मैं,
क्योंकि हिंदी हूँ मैं ,हिंदी हूँ मैं

SHALINIAGAM HINDI DIWAS ( क्योंकि हिंदी हूँ मैं)

क्योंकि हिंदी हूँ मैं ,हिंदी हूँ मैं !

हिंद में पैदा हुए ,
हिंद की हवा में जिए,
हिंदी में ही खाया,
पहना ,बोला और चला ,
प़र जब इतराने की बारी आई,
तो कंधे चौड़े किये अंग्रेजी में ?
अगर रख सको तो अस्तित्व हूँ मैं,
छुपा दो तो एक निशानी हूँ मैं,
गलती से खो दिया..........
तो केवल एक कहानी हूँ मैं,
अंग्रेजी के पत्थर खाकर भी,
मुस्कुराने की आदत है मुझे ,
दुनिया की नज़र में कुछ चुभी सी,
मगर गर्व की दास्ताँ हूँ मैं,
मेरे अपने चाहें ना पहचाने अब मुझको,
प़र उनकी रग-रग में बसी ,
उनके गौरव की आग हूँ मैं ,
मेरे कर्णधारों कुछ तो सोचो ,
तुम्हारे बुजुर्गों का मन-प्राण हूँ मैं,
क्योंकि हिंदी हूँ मैं ,हिंदी हूँ मैं

Saturday, September 11, 2010

dr.shaliniagam (tip of the day)

ये ज़िन्दगी बेहद खूबसूरत है,
अगर हम चाहें तो और भी ख़ूबसूरत हो सकती है ,
क्योंकि हमारी ख्वाहिश ये सृष्टि मानती है और उसे उसे पूरा करती है.
ये अलौकिक शक्तियां मेरे लियें अलादीन का चिराग़ हैं जो मांगती हूँ मिलता है.......
.......पैसा, प्यार, शौहरत , स्वास्थ्य .
हर पल जो चाहतो हो मांगो सृष्टि से ,
विश्वास करो कि जो माँगा है ,बस पा ही लिया है,
महसूस करो कि जो माँगा, उसे पाने के बाद कितनी ख़ुशी मिल रही है,
में जो चाहती हूँ ,उस पर विचार करती हूँ, कागज पर लिखती हूँ,
फिर अटूट विश्वास करती हूँ,आशावादी सोच रखती हूँ ,
फिर मैं उसे पा लेती हूँ .
हम सबको अपने और सृष्टि के बीच ताल-मेल बिठाना आना चाहिए
जब भी हालत बदलने हों ,पहले विचार बदलो .
क्योंकि मैं प्रकृति का , सृष्टि का, धन्यवाद करती हूँ , ज्यादा पाना चाहती हूँ तो शुक्रिया करती हूँ
इच्छा -शक्ति से क्या नहीं हो सकता ,आप अपनी इच्छा-शक्ति और यकीन से आप क्या नहीं पा सकते.
अपनी उम्मीद से बड़ी कोई तस्वीर , कोई इच्छा देखो,सोचो, आँखे बंद करके महसूस करें कि वह मजिल मैंने पा ली है .
डॉ.शालिनीअगम
2010

Wednesday, September 8, 2010

dr.shaliniagam (tip of the day)

Namaste India
१-चलो हम सब थोड़ी देर के लिए बिलकुल मासूम बन जाएँ , एक बच्चे कि तरह ,
२-जीवन कि उठा-पटक, competition, भाग-दौड़ सब-कुछ भूलकर,केवल अपने में खो जाएँ,
३- हमारा साथ देने के लिए केवल हमारा विश्वास, हमारी innocence ,और हमारी purity है,
४-हमारे चारों ओर केवल प्यार ही प्यार महसूस करें ,अपने दिल कि सुने ,जो करना चाहते है कर डाले ,
५-पूरी कायनात आज हमारे साथ है ,हम सृष्टि के संरक्षण में है ,हमारे साथ कुछ गलत हो ही नहीं सकता,
६-एकदम भोले बन जाओ, मासूम और भोले व्यक्ति का विश्वास अपार है, उसे कोई cheat नहीं कर सकता,
७-कभी-कभी लोग हमारी सादगी प़र हसेंगे,यंहा तक कि हम स्वयम को भी मूर्ख लग सकतें हैं ,प़र हमारी innocence
ही हमारी पहचान बनेगी.
८-हमारा निर्दोष -बच्चा मनऔर हमारा खुद प़र विश्वास ही हमारे guide बनेंगे .
डॉ.शालिनीअगम
०४/१६/१०

Sunday, September 5, 2010

शालिनीअगम (कुछ शब्द मेरे आपने) काम-ऊर्र्जा उपचार



शालिनीअगम (कुछ शब्द मेरे आपने) काम-ऊर्र्जा उपचार
नमस्ते भारतवर्ष,
काम -ऊर्जा से उपचार
काम-ऊर्जा को यदि हम क्षणिक काम-सुख पाने के लिए न करके ,रोग मुक्ति के लिए करें तो ? आश्चर्य -चकित न हों ध्यान से पढ़ें ..........
हमारा मन बहुत तीव्र गति से कार्य करता है ,अपनी बौद्धिक -शक्ति से हम मन को इच्छानुसार गति देने में सक्षम हैं

काम-सुख में निमग्न होते समय हम रोग-ग्रस्त भाग प़र ध्यान केन्द्रित करें.काम-ऊर्जा और रोग-ग्रस्त स्थल के बीच संपर्क स्थापित करें।
काम-सुख के चरम बिंदु प़र पहुँचने के क्षण ही हम काम-उर्जा को रोग-स्थल प़र पहुंचा दें । न-न कोई मुश्किल कार्य नहीं है बस थोडा सा मन को साधना है। जिस क्षण काम-ऊर्जा अपनी चरम-स्तिथि में आये तब उसी क्षण अपना ध्यान रोग-स्थल प़र केन्द्रित कर दें.एक पंथ दो काज । दोनों ही कार्य सफलता-पूर्वक हो जायेंगे.कोई तनाव नहीं लायें ना पहले ना बाद में केवल यह ठीक उसी पल संभव है जब चरम-बिंदु प़र पहुँचाने के लिए काम-ऊर्जा संचित होती है.

शिव और शक्ति के मिलन को रोग - निवारण का स्रोत भी बनाया जा सकता है।
Posted by shaliniagamaggarwal at 10:56 PM 9 comments Links to this post
Labels: ०५/१८/१०
Monday, May 10, 2010
tip of the day
Thinking positiv & living happily can revive your cells.
Posted by shaliniagamaggarwal at 8:36 PM 0 comments Links to this post
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