नमस्ते इंडिया ,
आज मैं आपको कहती हूँ ,अपने शरीर के सभी अंगों से आत्मीय व्यवहार अपनाएं,जिस अंग में परेशानी है ,उसे प्यार से सहलाएं ।
जैसे आपके घुटने में दर्द है ,उससे दोस्ती करें ..कैसे?
उसे प्यार से हाथ फेरें बात करें,"हे मेरे प्रिय घुटने मैंने तुम्हारे स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रक्खा ,जिस कारण तुम परेशान हो ।मुझे अपनी परेशानी का कारण बताओ। मुझे तुम्हारी ज़रुरत है ,बस तुम ज़ल्दी से ठीक हो जाओ "। तब लगेगा कि घुटना भी आपसे बातें करने लगा है ।उससे सम्बन्ध विकसित होने प़र आप पाओगे कि आपकी अवहेलना के कारण ,घंटों बिना विश्राम किये और उचित पौष्टिक आहार न लेने के कारण,हर पल दुखी और चिंता ओढने की आदत होने से ही ये समस्या हुई । तब आप जानोगे कि अपने शरीर के अंगों से प्यार जताने प़र उन्हें भी ख़ुशी मिलती है ,नयी ऊर्जा मिलती है जीने की । परिणाम दर्द गायब ...उनके प्रति संवेदनशीलता ,प्रेम व् सहानुभूति रखने के कारण ही हम स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने में सक्षम हो सकतें हैं ।
डॉ.शालिनीअगम
2010
Saturday, May 1, 2010
Friday, April 30, 2010
कुछ शब्द मेरे अपने ( प्यार )
प्यार से बड़ी कोई चीज नहीं
घृणा तो है सूखी बंजर ज़मीं
प्यार कि बरसती बूंदों से
आओ हम सब मिलजुल कर
भिगो दें उस प्यासी धरती को
पोषित-पल्लवित होंगे प्रेम-पुष्प
प्यार की रिम-झिम में धुलने दो
सारी कडवाहट ,भरने दो धरा की
सुखी दरारों में प्रेम के गीले मोती
चमचमाने दो मित्रता के हीरे -मानिक
विद्वेष ,घृणा , कडवाहट के
धुलने प़र लहलहाएगी
सद्भावना की खेती
जीवन को फलने-फूलने दो
स्वम को दूसरों की
स्तिथि में तोलने दो
जो सोचा दूसरों के विषय में
वही चिंतन होता है अपने बारे में
इंसान के जीवन में सबसे
ज्यादा ज़रूरी है प्रेम
प्रेम के इन्द्रधनुषी रंगों में
स्वम को भिगोने दो
फटने दो बादल कटुता का
बरसने दो प्रेम की रिम-झिम बरसात
बुझा दो प्यास धरती की
दे दो बस प्रेम की सौगात।
शालिनीअगम
घृणा तो है सूखी बंजर ज़मीं
प्यार कि बरसती बूंदों से
आओ हम सब मिलजुल कर
भिगो दें उस प्यासी धरती को
पोषित-पल्लवित होंगे प्रेम-पुष्प
प्यार की रिम-झिम में धुलने दो
सारी कडवाहट ,भरने दो धरा की
सुखी दरारों में प्रेम के गीले मोती
चमचमाने दो मित्रता के हीरे -मानिक
विद्वेष ,घृणा , कडवाहट के
धुलने प़र लहलहाएगी
सद्भावना की खेती
जीवन को फलने-फूलने दो
स्वम को दूसरों की
स्तिथि में तोलने दो
जो सोचा दूसरों के विषय में
वही चिंतन होता है अपने बारे में
इंसान के जीवन में सबसे
ज्यादा ज़रूरी है प्रेम
प्रेम के इन्द्रधनुषी रंगों में
स्वम को भिगोने दो
फटने दो बादल कटुता का
बरसने दो प्रेम की रिम-झिम बरसात
बुझा दो प्यास धरती की
दे दो बस प्रेम की सौगात।
शालिनीअगम
Tuesday, April 27, 2010
TIP OF THE DAY
HELLO INDIA,
Kill the stress before it kills you.
Reach the goal before it kicks you.
Help everyone before someone helps you.
Live life before life leaves you। हमें थोड़ी सी भी ख़ुशी तब मिलती है ,जब हम किसी को आगे बढने के लिएउत्साहित करतें हैं और कुछ ख़ुशी हमें तब मिलती है , जब हम
Kill the stress before it kills you.
Reach the goal before it kicks you.
Help everyone before someone helps you.
Live life before life leaves you। हमें थोड़ी सी भी ख़ुशी तब मिलती है ,जब हम किसी को आगे बढने के लिएउत्साहित करतें हैं और कुछ ख़ुशी हमें तब मिलती है , जब हम
किसी दूसरे के लिए कोई त्याग करतें हैं । किसी दुखी व्यक्ति के दुःख का भार जब हम कुछ कम कर देतें हैं , तबमन में बड़ा आनंद आता है। प्रसन्नता एक इसी अमूल्य देन है जो हमारे अच्छे विचारों ,दूसरों की भलाई के लिएकिये गए कामों और नि:स्वार्थ सेवा करने से प्राप्त होता है . अब्राहम लिंकन ने कहा है कि "लोग अपने मन में जितनी प्रसन्नता पाने का निश्चय करतें हैं उतनी ही प्रसन्नता उन्हें मिलती है .सुख और ख़ुशी कहीं बाहर से नहीं मिलती वो तो हमारे हृदय में ही है ।हर दिल में भगवन बसतें है तो फिर देर किस बात कि इंडिया ........प्यार बांटते चलो । प्यार लो-प्यार दो........
डॉ.शालिनीअगम
2010
Saturday, April 24, 2010
कुछ शब्द मेरे अपने (Tip of the day)
Namaste India
1-जिस तरह हम अच्छी किताब को केवल अपने लाभ के लिए चुनते हैं उसी तरह से साथी या समाज भी ऐसा
चुनें जिससे कि हमें कुछ लाभ हो ।
२-सबसे अच्छा मित्र वही है कि जिससे अपना किसी तरह से सुधार हो और आनंद की वृद्धि हो ।
३-कडुवी ,हानिकारक, दुष्ट भावों को भड़काने वाली, भ्रम पूर्ण बाते ना कहें
४- मधुर,नम्र,विनय- युक्त ,उचित और सद्भावना युक्त बातें करें ,जिससे दूसरों प़र अच्छा प्रभाव पड़े ,उन्हें प्रोत्साहन
मिले ,ज्ञान वृद्धि हो,शांति मिले तथा सन्मार्ग प़र चलने कि प्रेरणा हो।
५-ज्यादा बक-बक करने कि कोशिश ना करें अनावश्यक,अप्रासंगिक,अरुचिकर बातें करना,अपने आगे किसी
की सुनना ही नहीं ,हर घडी चबड़-चबड़ जीभ चलाते रहना, अपनी योग्यता से बाहेर कि बातें करना ,शेखी बघारना, वाणी के दुर्गुण हैं याद रखना ....एसे लोगों से लोग दूर भागने लागतें हैं ।
५-हम जैसा व्यवहार दूसरों से चाहतें हैं ,वैसा व्यवहार हम भी खुद दूसरों के साथ करें ।
६- आपसी सहयोग कि भावना को समझें ,याद रहे एक- दूसरे के सहयोग में ही हम सबकी उन्नति है ।
Wednesday, April 21, 2010
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