Sunday, October 10, 2010

shaliniagam (काश वो ऐसी सुबहा हो)

नींद की सरगोशी में

अंगड़ाई टूटे आलिंगन में तुम्हारे


काश वो ऐसी सुबहा हो

अलसाई मदहोशी में होंठ तेरे

कुछ बुदबुदाएं यूँ ..........

उनकी छुअन से शरमा जाऊं

आंखे खुलें और देखें तो

सामने तुम्हारा चेहरा हो ..

लेकर मुझको बाँहों में

बस हम यूँ ही सिमटें रहें
फ़िक्र ना हो कहीं दुनिया की
ना कोई और फ़साना हो

काश वो ऐसी सुबहा हो

अपनी कोमल चेहरे को

पाऊँ जब तेरी हथेलियों में

मुख मेरा चूमों तुम

बिखरी सूरज की किरणों में

भीगी लटें जब मेरी बिखरें

तुम्हारे कपोलों प़र और कुछ

बूंद गिरे अनजाने में
काश वो ऐसी सुबहा हो

तुम चुपके से आ जाओ

और झांक के मेरी सांसों में

विरह की पीर भुला जाओ

मन महके तुम्हारी खुशबू से

और महके मेरी सांसे भी …

जब तुम मुझको प्यार करो

एक हो जाएँ फूल में सुगंध से

काश वो ऐसी सुबहा हो

shaliniagam ( काश वो ऐसी सुबहा हो)



नींद की सरगोशी में

अंगड़ाई टूटे आलिंगन में तुम्हारे


काश वो ऐसी सुबहा हो

अलसाई मदहोशी में होंठ तेरे

कुछ बुदबुदाएं यूँ ..........

उनकी छुअन से शर्मा जाऊं

आंखे खुलें और देखें तो

सामने तुम्हारा चेहरा हो ..

लेकर मुझको बाँहों में

बस हम यूँ ही सिमटें रहें
फ़िक्र ना हो कहीं दुनिया की
ना कोई और फ़साना हो

काश वो ऐसी सुबहा हो

अपनी कोमल चेहरे को

पाऊँ जब तेरी हथेलियों में

मुख मेरा चूमों तुम

बिखरी सूरज की किरणों में

भीगी लटें जब मेरी बिखरें

तुम्हारे कपोलों प़र और कुछ

बूंद गिरे अनजाने में
काश वो ऐसी सुबहा हो

तुम चुपके से आ जाओ

और झांक के मेरी सांसों में

विरह की पीर भुला जाओ

मन महके तुम्हारी खुशबू से

और महके मेरी सांसे भी …

जब तुम मुझको प्यार करो

एक हो जाएँ फूल में सुगंध से

काश वो ऐसी सुबहा हो


Monday, October 4, 2010

shaliniagam (shubh aarogyam)

नमस्ते भारतवर्ष
करो वही जिसका संशय हो कि नहीं होगा तुमसे ,
हारोगे ................ कोई बात नहीं,
फिर से करो ........परिणाम पहले से बेहतर होंगे ,
फिर भी गर उम्मीद प़र खरे न उतर पाओ.........
प्रयत्न करो ,फिर उठो,फिर जुट जाओ..........
अच्छा और पहले से अच्छा होने लगेगा
याद रखो .......करत-करत अभ्यास के ,
जड़मति होए सुजान ..........और ........
जो व्यक्ति कभी जीवन में लुढका नहीं ,
वो कभी ऊंचाई प़र भी नहीं पहुँच पाया ,
अब यही क्षण तुम्हारा है ...........जीत लो दुनिया को .
क्योंकि अब जीत सिर्फ तुम्हारी है
वन्दे मातरम
शालिनिअगम

जनक-जननी को हार्दिक सप्रेम dr.shaliniagam

अपने भीतर खोजो .................... कौन है जो तुम्हे उकसाता है, प्रेरणा देता है नित नए संकल्पों की, संकल्पों को पूरा करने वाली शक्ति की ?
कौन है जो तुम्हे जगाता है,उठकर चलने का उत्साह देता है?
कौन है जो तुम्हे झिंझोड़ता है, सही -गलत का ज्ञान करता है?
कौन है जो रचता है मन में हर-पल कुछ नया, कुछ नवीन ,अनोखा ,सबसे अलग कुछ करने का हौसला?
और
कौन है जो तुम्हारे हारे हुए मन को देता है ,फिर से उठ खड़े होने का अदम्य साहस /
हाँ हम है ठीक तुम्हारे पीछे ,कूद पड़ो जीवन समर में ,और हांसिल कर लो अपने हिस्से की जीत .....................
हाँ वो ही हैं तुम्हारे जनक और जननी .......
जो खुद हार कर भी जिताएंगे तुम को
तब ........मुस्कुराएंगे विजय प़र अपनी
डॉ.शालिनिअगम जनक-जननी को हार्दिक सप्रेम

Saturday, October 2, 2010

SHALINI (SHUBH AAROGYAM)अपनी मनोकामना पूरी कैसे करें

नमस्ते भारतवर्ष
अपनी मनोकामना पूरी कैसे करें
चलिए में आपको बतातीं हूँ .
हमें अपने जीवन से क्या चाहिए .......?
शक्ति एवं बुद्धि ,शोर्य ,तेज,ओज,शांति,धन-संपत्ति , उत्तम स्वास्थ्य ,दाम्पत्य जीवन में मधुरता ,सभी दिलों में प्यार का प्रसार,कार्य-क्षमता में वृद्धि , मानसिक शांति की प्रचुरता,स्वम को
समझने की शक्ति इत्यादि-इत्यादि ....
ह्रदये की गेहाईयों में हमारी आकांशाएं क्या, हम कैसे लोग चाहतें हैं ,कैसी परिस्तिथियों को हम पसंद करतें हैं,क्या-क्या सुविधाएँ जीवन में चाहियें . इन सबका मूल्यांकन करके चयन
करें और प्राथमिकता दें उस बात को , उस मनोकामना को जो सबसे तीव्र है और तब उसको पूर्ण करने का संकल्प लें .
मनोकामना सिद्ध करने के लिए चर चरणों से निकलना पड़ता है ................
प्रथम चरण
सर्वप्रथम अपने दृष्टिकोण को सकारात्मक बनाइये .अपने अन्दर की नकारात्मकता को दूर निकाल फेंकिये
भरपूर आत्मविश्वास के साथ जीवन -समर में विजय की भावना के साथ खड़े हो जाइये .
दृढ निश्चय के साथ अपनी मनोकामना को पूर्ण करने के लिए मनोकामना -सिद्ध ध्यान के लिए तैयार हो जाइये .
द्धितीय चरण
प्राथमिकता सबसे आवश्यक मनोकामना को दें अपना लक्ष्य चुनें जो वस्तु या परिस्थिती आप चाहतें हैं उसे स्पष्ट रूप दें ,
उसकी मानसिक कल्पना करें ,ऐसे मनन करें या जागी आंखों से अपने लक्ष्य को इस प्रकार निहारें कि लगे कि सभी कुछ आपके अनुसार
घटित हो रहा है ........
उदाहरण के लिए ...अगर आप छरहरा व् आकर्षक व्यक्तित्व चाहतें है तो स्वंय को उसी स्तिथि में विचारें कि आप बेहद स्वस्थ , सुंदर व् आकर्षक बदन के स्वामी अथवा स्वामिनी हैं आप से अधिक आकर्षक कोई नहीं.
अगर आप मानसिक तनावों से मुक्त होना चाहतें हैं तो अनुभव करें कि "मुझे किसी प्रकार की कोई चिंता नहीं है ","में विश्रामावस्था में हूँ ",
"शांत व् प्रसन्न-चित्त हूँ ". इसी प्रकार घर चाहतें है तो सुंदर , आरामदायक घरकी कल्पना कीजिये ......"आप आराम कुर्सी प़र बैठें है ,सुंदर व् आकर्षक घर है चारों ओर शांति व् हरियाली है ...."
कष्ट दूर करना है तो उस रोग से मुक्त होने की कल्पना कीजिये और स्वंय को पूर्ण रूप से स्वस्थ अनुभव अनुभव करने की मनोकामना को बार-बार दोहराते हुए
कल्पना करें कि आपके शरीर में १६ साल जैसे बालक के समान उर्जा व् शक्ति का संचार हो रहा है , आप रोग मुक्त व् बेहद शक्तिवान हैं.अपनी कोई भी इच्छा जो आप पूरी होते देखना चाहतें हैं उसको मान कर चलिए कि वह पूरी हो रही है स्वंय को सकारात्मक सोच में ढालिए .
BY SHALINI
DIRECTER & FOUNDER
SHUBH AAROGYAM
The spiritual reiki healing & training center
www.aarogyamreiki.com

Saturday, September 25, 2010

SWEET ANGEL (shub aarogyam) समय की लीला



समय की लीला
वो बाग़,वो आँगन में किलकती हँसी,
चांदनी से नहाई ,छत प़र बिखरती ख़ुशी,
कभी कैरम,कभी बैड-मिन्टन कभी ताश के पत्ते ,
सजती शतरंज की बिसातें और घूमते मोहरें ,
ताने छेड़ती हारमोनियम प़र अंगुलियाँ ,
मचलती स्वर लहरियां ,साथ होती सखियाँ ,
कभी सावन की रिमझिम में झूला झूलती ,
कभी घर-भर में भैया के साथ फुदकती ,
साइकिल का कम्पटीशन जीतती ,इतराती
लौटती जीतकर नृत्य व् गान प्रतियोगिता ,
छम-छम करते पाँव छनकते घर -भर में
कभी माँ ,कभी अम्मा से बतियाती
दो चोटियाँ ,रेशमी आँचल लहराती,
हर बार कक्षा में प्रथम आती,
बुआ ,छोटी बहिन, टीचर ,सहेलियों की जान,
बुआ दादा-दादी चाचा-चाची की मुस्कान ,
माँ की दुलारी और पापा की 'लाले -जान'

२० वर्ष बाद ........................................

प्रौढ़ा होती,रोगिणी ,एकाकी जीवन जीती वो ,
ताने -उलाहने -प्रतारणा सहती वो 
जीवन -साथी के होते हुए भी ,
कितनी अकेली,कितनी लाचार वो,
एक दु:स्वप्न देख रही है
हाँ कटु सत्य बीस वर्षीय लम्बा स्वप्न ,
यौवन के मधुमास जिए ही नहीं ,
चंदा -चकोर समान प्यास बुझी ही नहीं,
मन के हर ओर अकेलापन कितना
जैसे एक अरण्यानी में साँझ का उदास झरना ,
बचपन की अल्हड -सौम्यता बदलकर ,
बनती जा रही है उदासी का सरोवर ,
आश्चर्य! कैसे हो जाती है ?
एक शोख चंचल नदिया एक शांत सागर
विचलन,अस्थिरता ,विलाप और अश्रु
क्या यही है उस "ख़ुशी" का जीवन ?

२०१०

SWEETANGEL (shubh aarogyam ) TIP OF THE DAY

(अपने निर्णय शांत होकर लें )
नमस्ते भारतवर्ष ,
सफलता जीवन में सभी चाहतें हैं ,कोशिश भी करतें हैं ,प़र कुछ बातों को व्यवहार में ढाल लिया जाये तो काम आसान हो जाता है जैसे-
१- जब आपका मन पूरी तरह स्थिर हो तभी कोई अहम् फैसला लें .जल्दबाजी या गुस्से में लिया कोई भी फैसला कभी ठीक नहीं होता .जब आपका मस्तिष्क -रुपी घोडा आपके काबू में हो तभी कोई महत्वपूर्ण कार्य को अंजाम द्दें .इस बात का सदा ध्यान रखें कि दुखी अथवा उलझन पूर्ण -स्तिथि में किसी भी समस्या का निर्णय नहीं लिया जा सकता
२-यदि आपका मानसिक संतुलन सही है ,तो आप किसी भी शत्रु को स्वं प़र आक्रमण नहीं करने देंगें ,जब भी कभी निराशा में हों ,अवसाद से घिरें हों ,उदासीन हों तब कभी भी कोई निर्णय न लें बल्कि प्रयास करें कि मन में अवसाद और निराशा जैसे विकारों को आने ही न दिया जाये .और अगर कभी मन विचलित हो भी तो उसे अपने मन-मस्तिष्क प़र हावी न होने दें क्योंकि -सांसारिक सफलताओं में मानसिक संतुलन का बहुत महत्त्व है सदैव शांत मन से हर कार्य के सकारात्मक व् नकारात्मक दोनों पहलुओं प़र सोच विचार करके ही निर्णय लें .
३-जीवन में उत्साह होना बहुत ज़रूरी है और वो अपने मन से ही पैदा होता है,उत्साह हीनता से आपकी निर्णय शक्ति हीन और क्षीण हो जाती है, भय के दबाब में आकर व्यक्ति प्राय: अपनी कार्यक्षमता प़र अविश्वास करके
मूर्खतापूर्ण कार्य करने लगता है .इसलिए जब भी आप यह जानने में असमर्थ हो जाएँ कि आपको क्या करना है,किस रास्ते जाना है,तो शांत होकर विचार करें
४- अस्थिर न हों ,परमशक्ति प़र विश्वास रखें, स्वं प़र विश्वास रखें , शांत और स्थिर होकर बैठें ,मनन करें -आपको रास्ता मिल जायेगा .
५-जब मन में भय अथवा चिंता घिरी रहती है तो सारी मानसिक व् शारीरिक शक्तियों का ह्रास होने लगता है . उस समय आप एकाग्र चित्त होकर किसी भी बात का सही निर्णय नहीं कर पाते.इसलिए पहले निर्णय लेने के लिए मन को शांत करें .
६- सारी चिंताओं व् उलझनों को एक बार कोशिश कर झटक कर मन से बाहर फेंके ,शांत भाव से अपने कक्ष में बैठें ,अपने मन से आँखे बंद कर बात करना आरम्भ करें , तत्पश्चात अपने मस्तिष्क प़र ऐसा अधिकार जमाये,उसे आदेश दे कि ,"ओ मेरे मन केवल कुछ समय के लिए ही सही तू चिंता मुक्त हो जा,भविष्य में क्या लिखा है तू नहीं जनता ,परेशानी छोड़ ,मेरा सच्चा मार्गदर्शक बन , तू अकेला नहीं है ,मैं और मेरी सकारात्मक सोच तेरे साथ है ,तुझे वही मार्ग चुनना है जो मेरे हित में है, बस थोड़ी देर के लिए शांत होकर हर चिंता व् दुविधा को त्याग दे फिर देख तू और मैं मिलकर कितनी सफलता अर्जित करेंगे .रे मेरे मन तू मेरी कमजोरी नहीं मेरी ताक़त बन ,अगर मन प्यार से न माने फिर भी चिंता व् उलझन कि ही स्तिथि में रहे तो उसे फटकार लगा कर कहें " आज तुझे मेरा कहना मानना ही होगा जो परेशानी आई है उसको धैर्य के साथ टालना ही होगा और निर्णय मेरे ही पक्ष में देना होगा "..................................
७- अस्थिर मन को डाँट लगाकर उसे अपने हिसाब से चलने का आदेश दें ,जिस प्रकार घोड़े की लगाम को कसकर और चाबुक लगाकार घोड़े को सही दिशा में चलने प़र विवश किया जाता है .
द्वारा
SWEET ANGEL
शुभ आरोग्यं
दिल्ली -११००५१