Monday, October 22, 2012

( जाने अपने मन का विज्ञानं) by Dr.Sweet Angel


जाने अपने मन का विज्ञानं)
नमस्ते भारतवर्ष  
यह बहुत ही ध्यान देने वाली और आश्चर्य जनक बात है कि हमारी 50बीमारियों के कारण पूर्णतया नोवैज्ञानिक होतें हैं.प्रत्यक् या अप्रत्यक्ष रूप से हमारे  रोगों की वजह हमारे बीमार -विचा हीं हैं.जब हम अपने मन के  विज्ञानं को जानने कि चेष्टा करतें है ,अपने आहार-विहार प़र ध्यान देतें हैं,मानसिक क्लेशों  का  कारण जानने की कोशिश करतें  हैं  तो स्वतही हमें अपनी बीमारी की वजह समझ आने लगती है.तब हमें ज्ञात होता है कि रोगों   जड़े तो हमारे मनोवेगों में ैं 
मेडिकल साइंस में शायद इस बात  का जिक्र नहीं है कि हम अपने विचारों और दिमाग को शारीर से अलग नहीं कर सकतें है  नई खोज तो यंहा तक बताती है कि जींस भी विचारों से बदलने की क्षमता रखतें हैं .अगर हम गौर करें तो पाएंगे कि संकल्प की शक्ति ही हमें अनेक बीमारीओं से दूर ले जा  सकती   है .कहा भी गया है 'मन  हारे हार है-मन के जीते जीत ' 
जब हम हँसतें हैं ,और प्रसन्न हतें हैं तब शरीर का हर एक अंग हमारे साथ हँसता है और जीवन -वृद्धि का सन्देश हमारी कोशिकाओं तक पहुंचता है  वैज्ञानिक सिद् कर चुकें हैं कि एक प्रसन्न- चित्त व्यक्ति में एक खास किस्म 'के 'हारमोंस ' अलग होतें हैं जो स्फूर्ति   से  भरे अंग-प्रत्यंग,चमकदार सुन्दर त्वचा ,स्वस्थ शरीर प्रदान करतें हैं इसके ठीक विपरीत जो व्यक्ति क्रोधित,उदास और निराशा  से  भरें रहतें है उन्हें मिलता  है समय से पहले बुढ़ापा ,बीमारियाँ और रोगी काया.  हर हाल मैं खुश रहने वाले व्यक्तियों के हारमोंस ही ऐसे विशेष किस्म के  हारमोन है जो पूरे शारीर में  संचरित होते हुए हर कोशिका  मस्तिष्क से सम्बंधित करता है  बोध और चेतना अंतत:कोशिकाओं  की  झिल्ली प़र स्तिथ होतीं है 
औषधि-शास्त्र,दवा आदमी की ऊपरकी बीमारियों पकड़ता है प़र प्रसन्नता और सकारत्मक सोच का शास्त्र आदमी को भीतर से पकड़ता  है 

(अपने शरीर के साथ प्रेम सम्बन्)

आज मैं आपको कहती हूँ ,अपने शरी के सभी अंगों से आत्मीय व्यवहार अपनाएं,जिस अंग में परेशानी है ,उसे प्यार से सहलाएं 
जैसे आपके घुटने में दर्द है ,ससे दोस्ती करें ..कैसे?उसे प्यार से हाथ फेरें बात  करें  ,"हे मेरे प्रिय घुटने मैंने तुम्हारे स्वास्थ्य का ध्या नहीं   रक्खा ,जिस कारण तुम रेशान हो  ।मुझे अपनी परेशानी  का  कारण बताओ। मुझे तुम्हारी ज़रुरत है ,बस तुम ज़ल्दी से ठीक हो जाओ " तब लगेगा कि घुटना भी आपसे बातें करने लगा है ।उससे सम्बन्ध विकसित होने प़र आप पाओगे कि आपकी अवहेलना के कारण ,घंटों  बिना विश्राम किये और उचित पौष्टिक आहार  लेने के कारण, पल दुखी और चिंता ओढने की आदत होने से ही ये समस्या हुई  तब आप जानोगे कि अपने शरीर के अंगों से प्यार जताने प़र उन्हें भी  ख़ुशी  मिलती है ,नयी ऊर्जा मिलती है जीने की  परिणाम दर्द गायब ...उनके प्रति संवेदनशीलता ,प्रेम  व्  सहानुभूति रखने के कारण ही हम स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने मे सक्षम हो सकतें हैं 
प्रिय पाठक- गणों  अगर आपको मेरे इस आलेख से आपको तनिक भी ऊर्जा मिले और आप अपने को स्वस्थ व् सुखी  पायें तो मुझे अतीव हर्ष का अनुभव होगा ..............
दिवाली की हार्दिक शुभकामनाओ के साथ ...आपकी डॉ.स्वीट एंजिल 

Sunday, October 21, 2012

Sweet shalini ka sweet world kavita (भ्रूण -हत्या)

भ्रूण -हत्या

1-भ्रूण -हत्या ,भ्रूण -हत्या ,भ्रूण हत्या
 


जिसे देखो वही चिल्ला रहा है ,


कहानी और कवितायेँ लिख रहा है,


भाषण व् प्रवचन दे रहा है ,


रोको -रोको भ्रूण-हत्या रोको 


हर ओर बस इसी का शोर है 


...............................तो क्या रूक गयी भ्रूण हत्या ?


चिल्लाओ और चिल्लाओ 


बस बातें बनाओ ...................वही तो आती हैं हमें 


रचनाएँ लिखो भ्रूण-हत्या को पाप बताओ 


नारी जाती को महान बता कर ,


बेटियों की प्रशंसा में लम्बी चौड़ी बातें


कहो और सुनाओ या चिल्लाओ 


भ्रूण -हत्या महापाप के नारे लगाओ 


बेटी ये होती है -बेटी वो होती है 


सुन-सुन कर कान पक है अब सबके 


अब चुप करो सब,बंद करो सब ............................................................

पूछो उस औरत से जो औरत होने का रोना रोती है 


सबसे पहले उसी को जानने की ललक होती है 


कि  कोख में पलने वाला बच्चा लड़का  है या लड़की  ?


पति के लाख समझाने पर भी भागती है कन्या भ्रूण-हत्या को 


पूछो उस सास से जो बहुएँ तो बड़ी शान से लाती है,


पर पोती की दादी कहलाने से शर्म से मर जाती है ,


'अरी कुलछनी बेटे का मुह दिखाए बिना ही मार देगी मुझे '


कह कर हाय-हाय चिल्लाती है ....................


इतिहास गवाह है !

......................


....................लक्ष्मी आई है ............

.सुनकर देवी ,चंडी का रूप धर लेती हैं 

हाँ-हाँ खुद तो  बेटा  जन के बैठी हैं 


हमारी बेटी होने की ख़ुशी मना रही है।


जब इस दुनिया की आधी सत्ता (स्त्री )


खुद ही अपने को समाप्त करना चाहती है 


तो आधी सत्ता (पुरुष) बेचारा क्या करे ............


बस नियति का नियम मान स्वीकार ले .............

डॉ .शालिनी अगम 

Tuesday, October 16, 2012

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Reiki Sparsh Tarang........ congratulations Dr.Shalini Agam


Reiki Sparsh Tarang....... Congratulations....Dr. Shalini Agam


I am Honored.......
:)

Thanks ...... " Guru Ma"
Dr.Manju Lata Singh

Tuesday, July 3, 2012

नमस्ते भारतवर्ष,
आप सभी बुद्धिजीवियों.........जिनके हृदय मैं भी प्रेम की चंचल धारा  मचलती है।.........अपूर्व सौदर्य देखकर जिनके मन मैं भी  से एक छोटा सा प्रश्न 

Friday, March 23, 2012

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